स्क्रॅप कर और भूल जा
September 25, 2006
स्क्रॅप कर और भूल जा॥
रीप्लाय की अपेक्षा मत रख॥
किया हुआ स्क्रॅप कभी व्यर्थ नही जाता॥
सबको अपने किये का रीप्लाय मिलता हि है॥
तू जिसे अपना कह रहा है वह किसी और का है॥
तू कौनसा स्क्रॅप लाया था जो लेकर जायेगा॥
तू इस स्क्रॅप को सेवा समझकर किसी और को स्क्रॅप कर दे॥
औरकुटिंग बिना चैन कहां रे
September 18, 2006
बप्पी दा इश्टाईल:
औरकुटिंग बिना चैन कहां रे…
स्करैपिंग बिना चैन कहां रे…
सोना नहीं चांदी नहीं,औरकुट तो मिला
अरे औरकुटिंग कर ले….
…अल्ताफ राजा शैली:
तुम तो ठहरे औरकुटवाले..
साथ क्या निभाओगे…
सुबह पहले..
सुबह पहले मौके पे
नेट पे बैठ जाओगे…
तुम तो ठहरे औरकुटवाले…
साथ क्या निभाओगे..
…जॉनी वॉकर माफ़िक:
जब सर पे ख्याल मंडराएं,
और बिल्कुल रहा ना जाए..
आजा प्यारे औरकुट के द्वारे,
काहे घबराए… काहे घबराए…
सुन सुन सुन, अरे बाबा सुन
इस औरकुटिंग के बड़े बड़े गुन
हर औरकुटर बन गया है पंडित
गूगल भी थर्राए…
काहे घबराए… काहे घबराए…
मैं और मेरा रूममेट अक्सर ये बातें करते हैं,
September 18, 2006
मैं और मेरा रूममेट अक्सर ये बातें करते हैं,
घर साफ होता तो कैसा होता.
मैं किचन साफ करता तुम बाथरूम धोते,
तुम हॉल साफ करते मैं बालकनी देखता.
लोग इस बात पर हैरान होते,
उस बात पर कितने हँसते.
मैं और मेरा रूममेट अक्सर ये बातें करते हैं.
यह हरा-भरा सिंक है या बर्तनों की जंग छिड़ी हुई है,
ये कलरफुल किचन है या मसालों से होली खेली हुई है.
है फ़र्श की नई डिज़ाइन या दूध, बियर से धुली हुई हैं.
ये सेलफोन है या ढक्कन,
स्लीपिंग बैग है या किसी का आँचल.
ये एयर-फ्रेशनर का नया फ्लेवर है या ट्रैश-बैग से आती बदबू.
ये पत्तियों की है सरसराहट या हीटर फिर से खराब हुआ है.
ये सोचता है रूममेट कब से गुमसुम,
के जबकि उसको भी ये खबर है
कि मच्छर नहीं है, कहीं नहीं है.
मगर उसका दिल है कि कह रहा है
मच्छर यहीं है, यहीं कहीं है.
तोंद की ये हालत मेरी भी है उसकी भी,
दिल में एक तस्वीर इधर भी है, उधर भी.
करने को बहुत कुछ है, मगर कब करें हम,
इसके लिए टाइम इधर भी नहीं है, उधर भी नहीं.
दिल कहता है कोई वैक्यूम क्लीनर ला दे,
ये कारपेट जो जीने को जूझ रहा है, फिकवा दे.
हम साफ रह सकते हैं, लोगों को बता दें


