ने चाहे दुश्मन ज़माना हमारा !
सलामत रहे दोस्ताना हमारा !!
ना बिछड़ेंगे मर के भी हम दोस्तों !
हमें दोस्ती की कसम दोस्तों !!
पता कोई पूछे तो कहते हैं हम !
इक दूजे के दिल में रहते हैं हम !!
नहीं और कोई ठिकाना हमारा !
सलामत रहे दोस्ताना हमारा !

One Response to “चाहे दुश्मन ज़माना हमारा”

  1. nitin gupta Says:

    ने चाहे दुश्मन ज़माना हमारा !
    सलामत रहे दोस्ताना हमारा !!
    ना बिछड़ेंगे मर के भी हम दोस्तों !
    हमें दोस्ती की कसम दोस्तों !!
    पता कोई पूछे तो कहते हैं हम !
    इक दूजे के दिल में रहते हैं हम !!
    नहीं और कोई ठिकाना हमारा !
    सलामत रहे दोस्ताना हमारा !


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