ने चाहे दुश्मन ज़माना हमारा !
सलामत रहे दोस्ताना हमारा !!
ना बिछड़ेंगे मर के भी हम दोस्तों !
हमें दोस्ती की कसम दोस्तों !!
पता कोई पूछे तो कहते हैं हम !
इक दूजे के दिल में रहते हैं हम !!
नहीं और कोई ठिकाना हमारा !
सलामत रहे दोस्ताना हमारा !

स्क्रॅप कर और भूल जा॥
रीप्लाय की अपेक्षा मत रख॥
किया हुआ स्क्रॅप कभी व्यर्थ नही जाता॥
सबको अपने किये का रीप्लाय मिलता हि है॥
तू जिसे अपना कह रहा है वह किसी और का है॥
तू कौनसा स्क्रॅप लाया था जो लेकर जायेगा॥
तू इस स्क्रॅप को सेवा समझकर किसी और को स्क्रॅप कर दे॥

एक ऐसा गीत गाना चाह्ता हूं, मैं..
खुशी हो या गम, बस मुस्कुराना चाह्ता हूं, मैं..

दोस्तॊं से दोस्ती तो हर कोई निभाता है..
दुश्मनों को भी अपना दोस्त बनाना चाहता हूं, मैं..

जो हम उडे ऊचाई पे अकेले, तो क्या नया किया..
साथ मे हर किसी के पंख फ़ैलाना चाह्ता हूं, मैं..

वोह सोचते हैं कि मैं अकेला हूं उन्के बिना..
तन्हाई साथ है मेरे, इतना बताना चाह्ता हूं..

ए खुदा, तमन्ना बस इतनी सी है.. कबूल करना..
मुस्कुराते हुए ही तेरे पास आना चाह्ता हूं, मैं..

बस खुशी हो हर पल, और मेहकें येह गुल्शन सारा “अभी”..
हर किसी के गम को, अपना बनाना चाह्ता हूं, मैं..

एक ऐसा गीत गाना चाह्ता हूं, मैं..
खुशी हो या गम, बस मुस्कुराना चाह्ता